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Hindi Shayari


Main tanhai ko tanhai main tanha keise chhod doon.
Tanhai ne tanhai main tanha mera saath diya hai .

Rajat love Divya

Geet Mere Kisi Ko Udaas Mat Karna,
Kisi Ke Nain Saagar Mein Neer Mat Bharna.

Dukh Apnaa Le Man Ke Shise Mein Jad Kar,
Muskurana Sikh Le Tu Khushi Se Bichd Kar.
Peeda Ki Chaap Adhar Dwaar Par Mat Dharna,

Kanth Maun Hoga Ye Swar Maun Honge,
Ek Deewas Jab Mere Adhar Maun Honge.
Patjhad Mein Fulon Sa Yun Mat Mikharna,

Sangam Hriday Ka Hriday Se Karana,
Dwesh Aandhiyon Mein Prem Deepak Jalana.

Marne Se Tu Sau Baar Mat Darna.
Geet Mere Kisi Ko Udaas Mat Karna.

by rajnish raaj

Uddna chahte ho,
To uchaiyon se mat daro.
Aur agar chamakna chahte ho,
To parchhaiyon se mat daro.
Shashank Rayal

kisi ki bandagi badnam nhi hoti.
Khuda se koi baat anjan nhi hoti.
Khuda hampe meharban hai ye jaan gaye hain hum.
Warna anjane main aapse pehchan nhi hoti.
sohaib khan

बीते दिनों की वापसी…..
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कच्चे मकान की सोंधी सोंधी खुशबू दिमाग में रच बस गयी थी
वसारे की ढेकी, जाता , दरेती
हमको यादों के बंधन में कस रही थी
ब्रेड़ की रस्सी में पीढे का झूला
ठंढी के दिनों में परकोसे का कौड़ा
इन पुरानी चीजों की यादें
अलविदा कहने को नहीं हैं तय्यार
अब इन सब का क्या वजूद
इन सब से कैसा प्यार
अगर इन सब चीजों को नहीं भुलाऊंगा
तो ज़माने के साथ-साथ कैसे चल पाउँगा
खपड़ै का आबाई वतन पुराना हो चूका था
सच तो ये है इसमें मन नहीं लग रहा था
लोगों के मार्डन फ्लैट दिल को भा गए थे
पंखा किचन टाइल सोंचकर मज़े आ रहे थे
बहर हाल सारी सुविधाओं से लैस
करीबी शहर में नया फ्लैट बनवाया
बच्चों का रूम, बेडरूम, गेस्टरूम बना
लेकिन पैरेन्ट्स रूम नहीं बनवाया
मैंने सोचा बप्पा मIई पान खाते हैं
जहाँ पाते है थूकते हैं गंदगी फैलाते है
अब इस बुढापे में कुछ ही दिनों की बात है
पुराने घर में पड़े रहें मच्छरदानी तो साथ है
बुढापे में तो बीमारी लगी ही रहती है
बुढापा खुद बीमारी है दुनिया सच ही कहती है
साथ रहेंगे तो मजबूरन इलाज़ कराऊंगा
बच्चों को पढ़ाना भी है पैसा कहा से लाऊंगा
उनके चश्मे और दवा का खर्च बढ़ जायेगा
गाँव में पड़े रहें खांसी आये तो लहटोरा से काम चल जायेगा
बप्पा के चालीस साल बाद वक़्त ने करवट बदला,
मेरा बुढ़ापा आ रहा है
लिखने वाले ने सब लिख रख्खा था
सूद के साथ वापस आ रहा है
मैंने अपने पैरेन्ट्स के लिए रूम नहीं बनवाया
मेरे बच्चों ने मुझे उस से भी बुरा दिन दिखाया
फ्लैट के सामने बांसों पै टिकी हई टीन
टूटी खटिया फटी कथरी छींन लेती है रातों की नींन
बप्पा तो जरूरत पर खांसे और पान भी खाए
पान तो दूर खांसना मना है
चाहे छिछनी चढ़े या दम घुट जाए
वक्त के साथ मच्छरों की खुराक भी बढ़ गई है
हमारे लिए मच्छरदानी सपना बन के रह गयी है
आज बारिश में टीन चू रहा है
बौछार थपेड़े मार मार के
बप्पा की याद दिला रही है
सर्दी ज़ुकाम से सीना जकड़ा जा रहा है
आज हमको भी लहटोरे की याद आ रही है
मैंने जो किया अच्छा था या ये अच्छा हो रहा है
आने वाले दिनों से बेखबर बेटा एयर कंडीशन में सों रहा है
उसका बेटा अभी कमसिन है मगर हुशियार है
उसे मेरी फटी कथरी ,रजाई और पिचके बर्तनों से प्यार है
वह मुझसे कहता है दादा सामानों को पटको मत
ये सब बाद में मेरे काम आयेंगे
अब्बू के बुढ़ापे के लिए सामानो की ज़रूरत होगी
नया खरीदूंगा तो खर्चे बढ़ जायेंगे

लेखक ,,,,, डा. गुलाम रब

Khushi ek ehsaas hai,
jo har insan ke pass hai.
Usse mehsus karo toh hai,
warna Gum toh har pal tayar hai .

by Rashmi Sharma

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